श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  3.71.35 
ऋतुपर्णश्च राजेन्द्रो बाहुकस्य हयज्ञताम्।
चिन्तयन् मुमुदे राजा सहवार्ष्णेयसारथि:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
महाराज ऋतुपर्ण भी बाहुक की घुड़सवारी विद्या का विचार करके सारथि वार्ष्णेय सहित अत्यन्त प्रसन्न हुए ॥35॥
 
Maharaja Rituparna too, contemplating on Bahuka's knowledge of horse-riding, along with charioteer Varshneya, became very pleased. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)