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mahabharat 3.71.33: 'उसकी आयु का प्रमाण तो अन्यों के समान ही है, परन्तु उसके रूप में भेद है। फिर भी मैं अन्त में इस निष्कर्ष पर पहुँचता हूँ कि मेरे मत में बाहुक ही परम पुण्यशाली राजा नल है।'॥33॥   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  3.71.33 
वय:प्रमाणं तत्तुल्यं रूपेण तु विपर्यय:।
नलं सर्वगुणैर्युक्तं मन्ये बाहुकमन्तत:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'उसकी आयु का प्रमाण तो अन्यों के समान ही है, परन्तु उसके रूप में भेद है। फिर भी मैं अन्त में इस निष्कर्ष पर पहुँचता हूँ कि मेरे मत में बाहुक ही परम पुण्यशाली राजा नल है।'॥33॥
 
‘The evidence of his age is similar to that of the others, but there is a difference in his appearance. Nevertheless, I finally reach the conclusion that in my opinion, Bahuk is indeed the most virtuous King Nala.'॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)