श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.71.31 
प्रच्छन्ना हि महात्मानश्चरन्ति पृथिवीमिमाम्।
दैवेन विधिना युक्ता: शास्त्रोक्तैश्च निरूपणै:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अनेक महात्मा लोग छद्म रूप धारण करके इस पृथ्वी पर दिव्य अनुष्ठानों तथा शास्त्रविहित नियमों का पालन करते हुए विचरण करते हैं॥31॥
 
‘Many great souls, assuming disguised forms, wander about on this Earth, adhering to the divine rituals and the rules prescribed in the scriptures.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)