श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  3.71.29 
अथ चेह नलो विद्यां वेत्ति तामेव बाहुक:।
तुल्यं हि लक्षये ज्ञानं बाहुकस्य नलस्य च॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में राजा नल जिस ज्ञान को जानते हैं, वही बाहुक भी जानता है। बाहुक और नल दोनों का ज्ञान मुझे एक ही प्रतीत होता है॥ 29॥
 
‘The knowledge which King Nala knows in this world is also known by Bahuk. The knowledge of both Bahuk and Nala appears to me to be the same.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)