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mahabharat 3.71.27: ‘अथवा ये आचार्य शालिहोत्र ही हैं, जो घोड़ों की नस्ल और उनसे संबंधित आवश्यक बातों को जानते हैं, जो अत्यंत सुंदर मनुष्य का रूप धारण करके यहाँ आए हैं?॥27॥   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  3.71.27 
शालिहोत्रोऽथ किं नु स्याद्धयानां कुलतत्त्ववित्।
मानुषं समनुप्राप्तो वपु: परमशोभनम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
‘अथवा ये आचार्य शालिहोत्र ही हैं, जो घोड़ों की नस्ल और उनसे संबंधित आवश्यक बातों को जानते हैं, जो अत्यंत सुंदर मनुष्य का रूप धारण करके यहाँ आए हैं?॥27॥
 
‘Or is this Acharya Shalihotra, who knows the breed of horses and the essential things related to them, who has come here in the form of a very beautiful human being?॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)