श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.71.24 
तथा तु दृष्ट्वा तानश्वान् वहतो वातरंहस:।
अयोध्याधिपति: श्रीमान् विस्मयं परमं ययौ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उन घोड़ों को वायु के समान वेग से रथ खींचते देख अयोध्या के राजा आश्चर्यचकित हो गये।
 
Seeing those horses pulling the chariot as fast as the wind, the noble King of Ayodhya was astonished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)