vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना
»
श्लोक 21
श्लोक
3.71.21
ततो नरवर: श्रीमान्नलो राजा विशाम्पते।
सान्त्वयामास तानश्वांस्तेजोबलसमन्वितान्॥ २१॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब पुरुषों में श्रेष्ठ राजा नल ने वेग और बल से युक्त उन घोड़ों को संबोधित किया॥21॥
Yudhisthira! Then the best of men, King Nala, addressed those horses full of speed and strength. 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×