श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.71.21 
ततो नरवर: श्रीमान्नलो राजा विशाम्पते।
सान्त्वयामास तानश्वांस्तेजोबलसमन्वितान्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब पुरुषों में श्रेष्ठ राजा नल ने वेग और बल से युक्त उन घोड़ों को संबोधित किया॥21॥
 
Yudhisthira! Then the best of men, King Nala, addressed those horses full of speed and strength. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)