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mahabharat 3.71.19: तब चतुर और कुशल राजा नल ने अच्छी नस्ल और अच्छे स्वभाव के चार तेज घोड़े रथ में जोत लिये।   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.71.19 
तत: सदश्वांश्चतुर: कुलशीलसमन्वितान्।
योजयामास कुशलो जवयुक्तान् रथे नल:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तब चतुर और कुशल राजा नल ने अच्छी नस्ल और अच्छे स्वभाव के चार तेज घोड़े रथ में जोत लिये।
 
Then the clever and skilful King Nala harnessed four swift horses of good breed and good nature to the chariot.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)