Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.71.17: मेरे द्वारा चुने हुए ये घोड़े अवश्य ही विदर्भ की राजधानी तक पहुँचेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है। महाराज! इनके अतिरिक्त जो घोड़े आपको उपयुक्त लगें, उन्हें मैं रथ में जोतूँगा॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 3.71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.71.17 
एते हया गमिष्यन्ति विदर्भान्नात्र संशय:।
यानन्यान् मन्यसे राजन् ब्रूहि तान् योजयामि ते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
मेरे द्वारा चुने हुए ये घोड़े अवश्य ही विदर्भ की राजधानी तक पहुँचेंगे, इसमें कोई संदेह नहीं है। महाराज! इनके अतिरिक्त जो घोड़े आपको उपयुक्त लगें, उन्हें मैं रथ में जोतूँगा॥ 17॥
 
These horses selected by me will certainly reach the capital of Vidarbha, there is no doubt about it. Maharaj! Apart from these, I will harness those horses in the chariot which you think are suitable.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)