श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 71: राजा ऋतुपर्णका विदर्भदेशको प्रस्थान, राजा नलके विषयमें वार्ष्णेयका विचार और बाहुककी अद्‍भुत अश्वसंचालनकलासे वार्ष्णेय और ऋतुपर्णका प्रभावित होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.71.1 
बृहदश्व उवाच
श्रुत्वा वच: सुदेवस्य ऋतुपर्णो नराधिप:।
सान्त्वयन् श्लक्ष्णया वाचा बाहुकं प्रत्यभाषत॥ १॥
 
 
अनुवाद
महर्षि बृहदश्व कहते हैं - युधिष्ठिर! सुदेवा के ऐसे वचन सुनकर राजा ऋतुपर्ण ने मधुर वचनों से उसे सान्त्वना दी और बाहुक से कहा -॥1॥
 
Sage Brihadashwa says - Yudhishthir! On hearing those words of Sudeva, King Rituparna consoled her with sweet words and said to Bahuka -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)