श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.70.9 
रहिता भर्तृभिश्चैव न कुप्यन्ति कदाचन।
प्राणांश्चारित्रकवचान् धारयन्ति वरस्त्रिय:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
श्रेष्ठ स्त्रियाँ अपने पति के त्याग देने पर भी कभी क्रोधित नहीं होतीं। वे अपने जीवन को सदाचार रूपी कवच ​​से ढँक लेती हैं।॥9॥
 
‘The best women never become angry even when their husbands abandon them. They wear their lives covered with the armour of good conduct.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)