श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  3.70.7 
स विनि:श्वस्य बहुशो रुदित्वा च पुन: पुन:।
कुशलं चैव मां पृष्ट्वा पश्चादिदमभाषत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
‘बाहुक बार-बार गहरी साँसें लेता हुआ बहुत बार रोया और मुझसे मेरा कुशल-क्षेम पूछकर इस प्रकार कहने लगा-॥7॥
 
‘Bahuk took deep breaths again and again and cried many times and after asking me about my well-being, he started saying this -॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)