Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.70.3-4: वहाँ, विशाल जनसमूह के बीच में, मैंने महाबली ऋतुपर्ण से आपकी बात कही। हे वरवर्णिनी! यह सुनकर राजा ऋतुपर्ण कुछ नहीं बोले। मेरे बार-बार पूछने पर भी, उनके किसी भी दरबारी ने उत्तर नहीं दिया। 3-4। | mahabharat अध्याय 3.70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रावितश्च मया वाक्यं त्वदीयं स महाजने।
ऋतुपर्णो महाभागो यथोक्तं वरवर्णिनि॥ ३॥
तच्छ्रुत्वा नाब्रवीत् किंचिदृतुपर्णो नराधिप:।
न च पारिषद: कश्चिद् भाष्यमाणो मयासकृत्॥ ४॥
अनुवाद
वहाँ, विशाल जनसमूह के बीच में, मैंने महाबली ऋतुपर्ण से आपकी बात कही। हे वरवर्णिनी! यह सुनकर राजा ऋतुपर्ण कुछ नहीं बोले। मेरे बार-बार पूछने पर भी, उनके किसी भी दरबारी ने उत्तर नहीं दिया। 3-4।
‘There, in the midst of a huge crowd, I told your words to the great Rituparna. O Varavarnini! On hearing that, King Rituparna did not say anything. Despite my repeated requests, none of his courtiers could answer it. 3-4.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥