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एवं तया यथोक्तो वै गत्वा राजानमब्रवीत्।
ऋतुपर्णं महाराज सुदेवो ब्राह्मणस्तदा॥ २७॥
अनुवाद
महाराज! दमयन्ती के ऐसा कहने पर ब्राह्मण सुदेव ने राजा ऋतुपर्ण के पास जाकर वही बात कही।
Maharaj! After Damayanti told this, Brahmin Sudeva went to King Rituparna and told the same thing.
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि दमयन्तीपुन:स्वयंवरकथने सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें दमयन्तीके पुन: स्वयंवरकी चर्चासे सम्बन्ध रखनेवाला सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७०॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥