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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना
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श्लोक 20
श्लोक
3.70.20
त्वया हि मे बहु कृतं यदन्यो न करिष्यति।
यद् भर्त्राहं समेष्यामि शीघ्रमेव द्विजोत्तम॥ २०॥
अनुवाद
'विप्रवर! आपने मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है, जो कोई और नहीं कर सकता; क्योंकि अब मैं शीघ्र ही अपने स्वामी से मिल सकूँगा।'
'Vipravara! You have done me a great favour, which no one else can do; because now I will be able to meet my master very soon.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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