श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  3.70.18-19 
विश्रान्तं तु तत: पश्चात् पर्णादं द्विजसत्तमम्॥ १८॥
अर्चयामास वैदर्भी धनेनातीव भाविनी।
नले चेहागते तत्र भूयो दास्यामि ते वसु॥ १९॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण पर्नाद के विश्राम करने के बाद विदर्भ की राजकुमारी दमयंती ने उन्हें बहुत सारा धन देकर उनका सत्कार किया और कहा, 'जब महाराज नल यहां आएंगे, तब मैं आपको और भी अधिक धन दूंगी।
 
After the Brahmin Parnaad had rested, Damayanti, the princess of Vidarbha, honoured him by giving him a lot of money and said, 'When Maharaja Nala comes here, I will give you even more money.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)