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mahabharat 3.70.14: युधिष्ठिर! पर्नाद के वचन सुनकर दमयन्ती के नेत्रों में आँसू भर आए। वह एकान्त में जाकर अपनी माता से बोली -॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.70.14 
एतच्छ्रुत्वाश्रुपूर्णाक्षी पर्णादस्य विशाम्पते।
दमयन्ती रहोऽभ्येत्य मातरं प्रत्यभाषत॥ १४॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! पर्नाद के वचन सुनकर दमयन्ती के नेत्रों में आँसू भर आए। वह एकान्त में जाकर अपनी माता से बोली -॥14॥
 
Yudhishthira! Damayanti's eyes filled with tears when she heard Parnad's words. She went into solitude and told her mother -॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)