श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 70: पर्णादका दमयन्तीसे बाहुकरूपधारी नलका समाचार बताना और दमयन्तीका ऋतुपर्णके यहाँ सुदेव नामक ब्राह्मणको स्वयंवरका संदेश देकर भेजना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.70.11 
प्राणयात्रां परिप्रेप्सो: शकुनैर्हृतवासस:।
आधिभिर्दह्यमानस्य श्यामा न क्रोद्‍धुमर्हति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'जिस मनुष्य के वस्त्र पक्षियों ने चुरा लिए हों और जो नाना प्रकार की मानसिक चिंताओं से जल रहा हो, उस पर श्यामा को क्रोध नहीं करना चाहिए॥11॥
 
'Shyaama should not be angry with a person whose clothes were stolen by birds while he was trying to earn his livelihood and who is burning with various kinds of mental worries.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)