श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.7.9 
अथवा ते ग्रहीष्यन्ति पुनरेष्यन्ति वा पुरम्।
निरस्य समयं सर्वे पणोऽस्माकं भविष्यति॥ ९॥
 
 
अनुवाद
अथवा यदि वे तुम्हारे पिता की बात मानकर अपनी प्रतिज्ञा तोड़कर इस नगर में आएँ, तो हम ऐसा ही व्यवहार करेंगे॥9॥
 
Or if they accept your father's words and break their promise and come to this city, then this is how we will behave.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)