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mahabharat 3.7.8: भरतवंशशिरोमणि! सभी पाण्डव सत्य के पालन में लगे हुए हैं। तात! वे तुम्हारे पिता की बात कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 8॥   |   mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  3.7.8 
सत्यवाक्यस्थिता: सर्वे पाण्डवा भरतर्षभ।
पितुस्ते वचनं तात न ग्रहीष्यन्ति कर्हिचित्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरतवंशशिरोमणि! सभी पाण्डव सत्य के पालन में लगे हुए हैं। तात! वे तुम्हारे पिता की बात कभी स्वीकार नहीं करेंगे। 8॥
 
Bharatvanshshiromane! All the Pandavas are engaged in following the truth. Tat! They will never accept your father's words. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)