Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.7.6: 'मैं या तो विष खा लूँगा, फाँसी लगा लूँगा, शस्त्र से प्राण त्याग दूँगा, अथवा जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर लूँगा; परन्तु पाण्डवों को फिर कभी बढ़ते और समृद्ध होते नहीं देख सकूँगा।'॥6॥ | mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विषमुद्बन्धनं चैव शस्त्रमग्निप्रवेशनम्।
करिष्ये न हि तानृद्धान् पुनर्द्रष्टुमिहोत्सहे॥ ६॥
अनुवाद
'मैं या तो विष खा लूँगा, फाँसी लगा लूँगा, शस्त्र से प्राण त्याग दूँगा, अथवा जलती हुई अग्नि में प्रवेश कर लूँगा; परन्तु पाण्डवों को फिर कभी बढ़ते और समृद्ध होते नहीं देख सकूँगा।'॥6॥
'I will either consume poison, hang myself, kill myself with a weapon, or enter a burning fire; but I will never be able to see the Pandavas grow and prosper again.'॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥