श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.7.5 
अथ पश्याम्यहं पार्थान् प्राप्तानिह कथंचन।
पुन: शोषं गमिष्यामि निरम्बुर्निरवग्रह:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'यदि मैं किसी प्रकार पाण्डवों को यहाँ आते देख लूँ, तो जल त्यागकर स्वेच्छा से अपना शरीर सुखा लूँगा ॥5॥
 
'If by any chance I see the Pandavas coming here, then I will abandon water and voluntarily dry my body. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)