श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.7.4 
यावदस्य पुनर्बुद्धिं विदुरो नापकर्षति।
पाण्डवानयने तावन्मन्त्रयध्वं हितं मम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
'जब तक पिता का मन पाण्डवों को वापस लाने की ओर पुनः आकर्षित न हो, तब तक आप लोग मेरे कल्याण के विषय में मुझे कोई अच्छी सलाह दीजिए।' ॥4॥
 
'Until this again draws father's mind towards bringing back the Pandavas, you all please give me some good advice regarding my welfare.' ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)