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mahabharat 3.7.23: उन्हें वन में जाते देख, दिव्य दृष्टि से सब कुछ देखते हुए, महाबली महर्षि शुद्धात्मा श्री कृष्णद्वैपायन व्यास सहसा वहाँ आ पहुँचे॥23॥   |   mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.7.23 
तान् प्रस्थितान् परिज्ञाय कृष्णद्वैपायन: प्रभु:।
आजगाम विशुद्धात्मा दृष्ट्वा दिव्येन चक्षुषा॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उन्हें वन में जाते देख, दिव्य दृष्टि से सब कुछ देखते हुए, महाबली महर्षि शुद्धात्मा श्री कृष्णद्वैपायन व्यास सहसा वहाँ आ पहुँचे॥23॥
 
Seeing them leaving for the forest, the powerful Maharishi Shuddhatma Shri Krishnadvaipayan Vyas, seeing everything with divine vision, suddenly came there. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)