श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.7.2 
स सौबलेयमानाय्य कर्णदु:शासनौ तथा।
अब्रवीद् वचनं राजा प्रविश्याबुद्धिजं तम:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने शकुनि, कर्ण और दु:शासन को बुलाया और अज्ञानजनित मोह में डूबे हुए होकर यह कहा-॥2॥
 
He called Shakuni, Karna and Dushasan and being immersed in the delusion born of ignorance, he said this -॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)