vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना
»
श्लोक 2
श्लोक
3.7.2
स सौबलेयमानाय्य कर्णदु:शासनौ तथा।
अब्रवीद् वचनं राजा प्रविश्याबुद्धिजं तम:॥ २॥
अनुवाद
उन्होंने शकुनि, कर्ण और दु:शासन को बुलाया और अज्ञानजनित मोह में डूबे हुए होकर यह कहा-॥2॥
He called Shakuni, Karna and Dushasan and being immersed in the delusion born of ignorance, he said this -॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×