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mahabharat 3.7.18: मेरी राय यह है कि हम लोग कवच धारण करें, रथों पर सवार हों, शस्त्र लेकर वनवासी पाण्डवों पर एक साथ आक्रमण करें और उन्हें मार डालें॥18॥   |   mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.7.18 
वयं तु शस्त्राण्यादाय रथानास्थाय दंशिता:।
गच्छाम: सहिता हन्तुं पाण्डवान् वनगोचरान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मेरी राय यह है कि हम लोग कवच धारण करें, रथों पर सवार हों, शस्त्र लेकर वनवासी पाण्डवों पर एक साथ आक्रमण करें और उन्हें मार डालें॥18॥
 
'My opinion is that we should wear armour, mount our chariots, take up arms and attack the forest-dwelling Pandavas together to kill them.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)