Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.7.17: हम सब लोग राजा दुर्योधन के सेवक और बाहु हैं; अतः हम सब मिलकर उसके प्रिय कार्य करेंगे; परन्तु हम आलस्य त्यागकर उसके प्रिय कार्यों में प्रवृत्त होने में असमर्थ हैं॥17॥   |   mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.7.17 
प्रियं सर्वे करिष्यामो राज्ञ: किङ्करपाणय:।
न चास्य शक्नुम: स्थातुं प्रिये सर्वे ह्यतन्द्रिता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हम सब लोग राजा दुर्योधन के सेवक और बाहु हैं; अतः हम सब मिलकर उसके प्रिय कार्य करेंगे; परन्तु हम आलस्य त्यागकर उसके प्रिय कार्यों में प्रवृत्त होने में असमर्थ हैं॥17॥
 
‘We are all servants and arms of King Duryodhana; therefore, we all will together perform his favourite tasks; but we are unable to give up our laziness and engage ourselves in his favourite activities.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)