Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.7.15-16: तब उसका आशय समझकर कर्ण ने क्रोधपूर्वक अपने सुन्दर नेत्र खोले और दु:शासन, शकुनि तथा दुर्योधन की ओर देखकर स्वयं भी उत्साह से भर गया और क्रोधित होकर बोला - 'हे भूमि के रक्षकों! इस विषय में मेरी राय सुनो।' 15-16. | mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब उसका आशय समझकर कर्ण ने क्रोधपूर्वक अपने सुन्दर नेत्र खोले और दु:शासन, शकुनि तथा दुर्योधन की ओर देखकर स्वयं भी उत्साह से भर गया और क्रोधित होकर बोला - 'हे भूमि के रक्षकों! इस विषय में मेरी राय सुनो।' 15-16.
Then understanding his intention, Karna angrily opened his beautiful eyes and looking at Dushasan, Shakuni and Duryodhan, he himself became full of enthusiasm and said angrily - 'O protectors of the land! Listen to my opinion on this matter. 15-16.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥