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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना
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श्लोक 12
श्लोक
3.7.12
कर्ण उवाच
काममीक्षामहे सर्वे दुर्योधन तवेप्सितम्।
ऐकमत्यं हि नो राजन् सर्वेषामेव लक्षये॥ १२॥
अनुवाद
कर्ण ने कहा- दुर्योधन! हम सब आपकी अभीष्ट इच्छा पूरी करने का प्रयत्न कर रहे हैं। राजन्! इस विषय में हम सब एकमत प्रतीत होते हैं।॥12॥
Karna said- Duryodhan! We all are trying to fulfill your desired wish. King! We all seem to be of the same opinion on this matter.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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