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mahabharat 3.7.11: दु:शासन बोला- हे बुद्धिमान चाचा! आप जो कुछ भी कहते हैं, वह मुझे भी उचित लगता है। आपके मुख से जो भी विचार निकलते हैं, वे मुझे सदैव अच्छे लगते हैं।   |   mahabharat अध्याय 3.7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 7: दुर्योधन, दु:शासन, शकुनि और कर्णकी सलाह, पाण्डवोंका वध करनेके लिये उनका वनमें जानेकी तैयारी तथा व्यासजीका आकर उनको रोकना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  3.7.11 
दु:शासन उवाच
एवमेतन्महाप्राज्ञ यथा वदसि मातुल।
नित्यं हि मे कथयतस्तव बुद्धिर्विरोचते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दु:शासन बोला- हे बुद्धिमान चाचा! आप जो कुछ भी कहते हैं, वह मुझे भी उचित लगता है। आपके मुख से जो भी विचार निकलते हैं, वे मुझे सदैव अच्छे लगते हैं।
 
Dushasan said- O wise uncle! Whatever you say, I also find it right. Whatever thoughts come out of your mouth, I always like them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)