वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वा च विदुरं प्राप्तं राज्ञा च परिसान्त्वितम्।
धृतराष्ट्रात्मजो राजा पर्यतप्यत दुर्मति:॥ १॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! विदुर आये और राजा धृतराष्ट्र ने उन्हें सान्त्वना देकर अपने पास रखा। यह सुनकर दुष्ट बुद्धि वाले धृतराष्ट्र पुत्र राजा दुर्योधन क्रोधित हो गये। ॥1॥
Vaishmpayana says - Janamejaya! Vidur came and King Dhritarashtra consoled him and kept him. On hearing this, King Duryodhan, the son of Dhritarashtra with an evil mind, became agitated. ॥1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)