श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.69.50 
तच्च वाक्यं तथा सर्वे तत्र तत्र विशाम्पते।
श्रावयांचक्रिरे विप्रा दमयन्त्या यथेरितम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! सभी ब्राह्मण जगह-जगह जाकर दमयन्ती के द्वारा कही गई बातें लोगों को सुनाते थे।
 
Maharaj! All the Brahmins used to go to different places and narrate to the people the words told by Damayanti. 50.
 
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि नलोपाख्यानपर्वणि नलान्वेषणे एकोनसप्ततितमोऽध्याय:॥ ६९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत नलोपाख्यानपर्वमें नलकी खोजविषयक उनहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६९॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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