श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.69.5 
अस्या रूपेण सदृशी मानुषी न हि विद्यते।
अस्या ह्येष भ्रुवोर्मध्ये सहज: पिप्लुरुत्तम:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
उसकी सुन्दरता के समान कोई भी मानव कन्या नहीं है। उसकी भौंहों के बीच एक सुन्दर जन्मचिह्न है ॥5॥
 
There is no human girl who can match her beauty. She has a beautiful birthmark between her eyebrows. ॥ 5॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas