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श्लोक 3.69.47  |
यदि वासौ समृद्ध: स्याद् यदि वाप्यधनो भवेत्।
यदि वाप्यसमर्थ: स्याज्ज्ञेयमस्य चिकीर्षितम्॥ ४७॥ |
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| अनुवाद |
| ‘उत्तर देनेवाला चाहे धनवान हो या निर्धन, योग्य हो या अयोग्य, यह जानने का प्रयत्न करो कि वह क्या करना चाहता है ।’ 47॥ |
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| ‘Whether the person answering is rich or poor, capable or incapable, try to know what he wants to do.’ 47॥ |
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