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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना
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श्लोक 47
श्लोक
3.69.47
यदि वासौ समृद्ध: स्याद् यदि वाप्यधनो भवेत्।
यदि वाप्यसमर्थ: स्याज्ज्ञेयमस्य चिकीर्षितम्॥ ४७॥
अनुवाद
‘उत्तर देनेवाला चाहे धनवान हो या निर्धन, योग्य हो या अयोग्य, यह जानने का प्रयत्न करो कि वह क्या करना चाहता है ।’ 47॥
‘Whether the person answering is rich or poor, capable or incapable, try to know what he wants to do.’ 47॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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