श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  3.69.45 
यश्चैवं वचनं श्रुत्वा ब्रूयात् प्रतिवचो नर:।
तदादाय वचस्तस्य ममावेद्यं द्विजोत्तमा:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणो! तुम्हारे इन वचनों को सुनकर जो भी मनुष्य उत्तर दे, उसे तुम सब स्मरण करके मुझसे कहो॥ 45॥
 
'O Brahmins! Whatever reply any person gives after listening to these words of yours, you all should remember that and tell me.॥ 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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