श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.69.43 
तत् कुरुष्व नरव्याघ्र दयां मयि नरर्षभ।
आनृशंस्यं परो धर्मस्त्वत्त एव हि मे श्रुत:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
हे व्याघ्र! हे पुरुषश्रेष्ठ! मुझ पर दया करो। मैंने आपसे सुना है कि दया ही सबसे बड़ा धर्म है।॥ 43॥
 
'O tiger! O best of men! Have mercy on me. I have heard from you that kindness is the greatest religion.'॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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