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mahabharat 3.69.42: 'आप एक प्रसिद्ध विद्वान् हैं, कुलीन कुल के हैं और सदैव सब पर दया करने वाले हैं; परंतु मुझे ऐसा संदेह होने लगा है कि आप मेरे प्रति क्रूर हो गए हैं, क्योंकि मेरा भाग्य नष्ट हो गया है ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 3.69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  3.69.42 
ख्यात: प्राज्ञ: कुलीनश्च सानुक्रोशो भवान् सदा।
संवृत्तो निरनुक्रोश: शङ्के मद्भाग्यसंक्षयात्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
'आप एक प्रसिद्ध विद्वान् हैं, कुलीन कुल के हैं और सदैव सब पर दया करने वाले हैं; परंतु मुझे ऐसा संदेह होने लगा है कि आप मेरे प्रति क्रूर हो गए हैं, क्योंकि मेरा भाग्य नष्ट हो गया है ॥ 42॥
 
'You are a renowned scholar, of noble family and always compassionate towards everyone, but I have started suspecting that you have become cruel towards me because my fortune has been ruined. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)