श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  3.69.41 
भर्तव्या रक्षणीया च पत्नी पत्या हि सर्वदा।
तन्नष्टमुभयं कस्माद् धर्मज्ञस्य सतस्तव॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
प्राणनाथ! पति को अपनी पत्नी की सदैव रक्षा और पालन-पोषण करना उचित है। आप तो धर्मज्ञ और धर्मात्मा हैं, फिर आपके ये दोनों कर्तव्य अचानक कैसे नष्ट हो गए?॥ 41॥
 
‘Praananath! It is appropriate for a husband to always provide for and protect his wife. You are a religious scholar and a virtuous man, how did these two duties of yours suddenly get destroyed?॥ 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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