श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.69.40 
एवमन्यच्च वक्तव्यं कृपां कुर्याद् यथा मयि।
वायुना धूयमानो हि वनं दहति पावक:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मणों! ऐसी और भी बहुत सी बातें कहो, जिससे वह मुझ पर दया करें। वायु से प्रज्वलित अग्नि सम्पूर्ण वन को जला देती है (जिस प्रकार विरह का दुःख मुझे जला रहा है)॥40॥
 
‘Brahmins! Please say these and many other things so that he may show mercy on me. The fire ignited by the wind burns the entire forest (in the same way the anguish of separation is burning me).॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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