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mahabharat 3.69.38: 'वह अब भी उसी अवस्था में है, जिस अवस्था में तुमने उसे देखा था और तुम्हारे आगमन की प्रतीक्षा कर रही है। वह युवती अपने शरीर को आधे वस्त्रों से ढके हुए, तुम्हारे विरह की अग्नि में निरन्तर जल रही है।' 38.   |   mahabharat अध्याय 3.69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  3.69.38 
सा वै यथा त्वया दृष्टा तथाऽऽस्ते त्वत्प्रतीक्षिणी।
दह्यमाना भृशं बाला वस्त्रार्धेनाभिसंवृता॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
'वह अब भी उसी अवस्था में है, जिस अवस्था में तुमने उसे देखा था और तुम्हारे आगमन की प्रतीक्षा कर रही है। वह युवती अपने शरीर को आधे वस्त्रों से ढके हुए, तुम्हारे विरह की अग्नि में निरन्तर जल रही है।' 38.
 
‘She is still in the same state in which you saw her and is waiting for your arrival. Covering her body with half clothes, that young girl is constantly burning in the fire of your separation. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)