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mahabharat 3.69.37: हे प्रिय जुआरी! मुझ पतिव्रता प्रिय पत्नी को, जो वन में सो रही है और मेरे वस्त्रों का आधा भाग फाड़ रही है, छोड़कर तुम कहाँ चले गए?॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 3.69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.69.37 
क्व नु त्वं कितवच्छित्त्वा वस्त्रार्धं प्रस्थितो मम।
उत्सृज्य विपिने सुप्तामनुरक्तां प्रियां प्रिय॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय जुआरी! मुझ पतिव्रता प्रिय पत्नी को, जो वन में सो रही है और मेरे वस्त्रों का आधा भाग फाड़ रही है, छोड़कर तुम कहाँ चले गए?॥ 37॥
 
'O beloved gambler! Where have you gone, leaving me, your beloved wife, who is asleep in the forest and is devoted to her husband, and tearing half of my clothes?॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)