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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना
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श्लोक 30
श्लोक
3.69.30
दमयन्त्या तथोक्ता तु सा देवी भृशदु:खिता।
बाष्पेणापिहिता राज्ञी नोत्तरं किंचिदब्रवीत्॥ ३०॥
अनुवाद
जब दमयंती ने यह कहा तो रानी की आंखें भर आईं और वह बहुत दुखी हो गईं और तुरंत कोई जवाब नहीं दे सकीं।
When Damayanti said this, the queen's eyes filled with tears. She became very sad and could not give him any immediate answer.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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