श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  3.69.28 
सा व्युष्टा रजनीं तत्र पितुर्वेश्मनि भाविनी।
विश्रान्ता मातरं राजन्निदं वचनमब्रवीत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! भाविनी दमयन्ती ने उस रात अपने पिता के घर विश्राम किया। प्रातःकाल होने पर उसने अपनी माता से कहा -॥28॥
 
Yudhishthira! Bhavini Damayanti rested that night at her father's house. When the morning came she said to her mother -॥28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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