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श्लोक 3.69.24  |
तत: सा न चिरादेव विदर्भानगमत् पुन:।
तां तु बन्धुजन: सर्व: प्रहृष्ट: समपूजयत्॥ २४॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् वह वहाँ से चली और कुछ ही दिनों में विदर्भ की राजधानी में पहुँची। उसके आगमन पर उसके माता-पिता तथा सब सम्बन्धी बहुत प्रसन्न हुए और सबने उसका बड़े आदर-सत्कार से स्वागत किया॥ 24॥ |
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| Thereafter, she left from there and in a few days she reached the capital of Vidarbha. Her parents and all the relatives were very happy on her arrival and everyone welcomed her with great hospitality.॥ 24॥ |
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