Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.69.20: 'मैंने अपने बच्चों को कुण्डिनपुर भेज दिया था। वे वहीं रहते हैं। वे अपने पिता से अलग हो गए हैं और मैं भी उनसे अलग हो गया हूँ। ऐसी स्थिति में वे दुःखी बच्चे कैसे रहते होंगे?॥20॥ | mahabharat अध्याय 3.69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दारकौ च हि मे नीतौ वसतस्तत्र बालकौ।
पित्रा विहीनौ शोकार्तौ मया चैव कथं नु तौ॥ २०॥
अनुवाद
'मैंने अपने बच्चों को कुण्डिनपुर भेज दिया था। वे वहीं रहते हैं। वे अपने पिता से अलग हो गए हैं और मैं भी उनसे अलग हो गया हूँ। ऐसी स्थिति में वे दुःखी बच्चे कैसे रहते होंगे?॥20॥
‘I had already sent my children to Kundinpur. They live there. They have been separated from their father and I have also been separated from them. How would those grieving children be living in such a condition?॥ 20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥