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mahabharat 3.69.19: "अब यदि मैं यहीं रहूँ तो मुझे अधिक सुख मिलेगा, इसमें संदेह नहीं है। किन्तु मैं बहुत दिनों से भटक रहा हूँ, अतः माता! मुझे विदर्भ जाने की अनुमति दीजिए।"   |   mahabharat अध्याय 3.69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  3.69.19 
सुखात् सुखतरो वासो भविष्यति न संशय:।
चिरविप्रोषितां मातर्मामनुज्ञातुमर्हसि॥ १९॥
 
 
अनुवाद
"अब यदि मैं यहीं रहूँ तो मुझे अधिक सुख मिलेगा, इसमें संदेह नहीं है। किन्तु मैं बहुत दिनों से भटक रहा हूँ, अतः माता! मुझे विदर्भ जाने की अनुमति दीजिए।"
 
"Now if I stay here, it will be more pleasurable for me, there is no doubt about it. But I have been wandering for a long time, so mother! Please give me permission to go to Vidarbha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)