श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.69.18 
अज्ञायमानापि सती सुखमस्म्युषिता त्वयि।
सर्वकामै: सुविहिता रक्ष्यमाणा सदा त्वया॥ १८॥
 
 
अनुवाद
‘माता! यद्यपि आप मुझे नहीं जानती थीं, फिर भी मैं आपके यहाँ बहुत सुख से रहता था। आपने मुझे सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान कीं और आप सदैव मेरी रक्षा करती रहीं।॥18॥
 
‘Mother! Although you did not know me, I lived very happily at your place. You provided me with all the facilities I wanted and I was always protected by you.॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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