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श्री महाभारत
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पर्व 3: वन पर्व
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अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना
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श्लोक 17
श्लोक
3.69.17
तां प्रहृष्टेन मनसा दमयन्ती विशाम्पते।
प्रणम्य मातुर्भगिनीमिदं वचनमब्रवीत्॥ १७॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! तब दमयन्ती ने प्रसन्न मन से अपनी बुआ को प्रणाम करके कहा-॥17॥
Yudhishthira! Then Damayanti bowed to her aunt with a happy heart and said -॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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