श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.69.16 
यथैव ते पितुर्गेहं तथैव मम भामिनि।
यथैव च ममैश्वर्यं दमयन्ति तथा तव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'भामिनी! तुम्हारे लिए मेरा घर तुम्हारे पिता के घर के समान है। दमयंती! यह सारा धन जैसे मेरा है, वैसे ही तुम्हारा भी है।'॥16॥
 
‘Bhamini! For you, my house is like your father's house. Damayanti! All this wealth is yours just like it is mine.'॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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