श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 69: दमयन्तीका अपने पिताके यहाँ जाना और वहाँसे नलको ढूँढ़नेके लिये अपना संदेश देकर ब्राह्मणोंको भेजना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.69.13 
उत्सृज्य बाष्पं शनकै राजमातेदमब्रवीत्।
भगिन्या दुहिता मेऽसि पिप्लुनानेन सूचिता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजमाता ने आँसू बहाते हुए धीरे से कहा - 'बेटी! तुम मेरी बहन की पुत्री हो। इसी चिह्न के कारण मैंने भी तुम्हें पहचान लिया।॥13॥
 
Thereafter the queen mother said softly while shedding tears - 'Daughter! You are my sister's daughter. Because of this mark I also recognized you.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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